उदयपुर शहर में “हरी” नाम का एक ऊँट पिछले 5 दिनों से लावारिस और गंभीर बीमार अवस्था में पड़ा हुआ था। इस संबंध में सूचना प्राप्त होने पर एनिमल प्रोटेक्शन सोसाइटी उदयपुर ने तुरंत संज्ञान लेते हुए रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
संस्था की संस्थापक डॉ. माला मट्ठा के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई करते हुए ऊँट का प्राथमिक उपचार बहुउद्देश्यीय पशु चिकित्सालय में डॉ. योगेश द्वारा किया गया। हालांकि उदयपुर में ऊँट के समुचित उपचार की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण “हरी” को आगे के बेहतर इलाज हेतु जोधपुर स्थित एक पशु सेवा संस्था में भर्ती करवाया गया है।
इस रेस्क्यू एवं उपचार कार्य में पार्षद महेश त्रिवेदी, शुभम चतुर्वेदी, कैलाश वैष्णव, यश जोशी एवं किरण भावसार का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
एनिमल प्रोटेक्शन सोसाइटी उदयपुर ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार से गंभीर सवाल उठाए हैं। संस्था का कहना है कि एक राजकीय पशु की इस तरह की दयनीय स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है? जो लोग इन पशुओं का वर्षों तक उपयोग करते हैं, उनके बीमार या अशक्त होने पर उन्हें लावारिस छोड़ देना अत्यंत चिंताजनक है।
संस्था ने मांग की है कि ऐसे मामलों में पशु मालिकों की जिम्मेदारी तय की जाए और सख्त नियम बनाए जाएं।
संस्था ने आमजन से भी अपील की है कि वे इस प्रकार के मामलों की सूचना तुरंत संबंधित संस्थाओं को दें, ताकि समय रहते पशुओं की जान बचाई जा सके।