उदयपुर। गर्मी में पशुओं का  डीवर्मिंग   करना नितान्त आवश्यक है अर्थात् कृमिनाशक दवा लेना लाभदायक होता है। यह जानकारी पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान के उपनिदेशक डॉ. द्वारकाप्रसाद गुप्ता ने दी। डॉ. गुप्ता ने बताया कि वातावरण मे तापमान वृद्धि से छोटे तालाबों, पोखरों एवं नालों का पानी वाष्पीकृत होकर उड़ना प्रारम्भ हो जाता है। अत बचे हुए कम पानी में कृमियों की सान्द्रता बढ़ जाती है यह पानी पशु के पीने में आने से कृमि पशु के शरीर में पहुंच जाते है जिससे पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, उत्पादन में भारी गिरावट होने की संभावना रहती है। अत ऐसे मौसम के प्रारम्भ में ही पशु को कृमिनाशक दवा देकर उन्हे सुरक्षित रखना चाहिए। प्रतिकूल परिस्थितियों में उचित पशु प्रबंधन एवं पशु आहार प्रबंधन के माध्यम से पशु उत्पादन को बनाए रखा जा सकता है एवं पशुधन को नष्ट होने से बचाया जा सकता है। संस्थान के अन्य अधिकारी डॉ. पदमा मील, डॉ. ओमप्रकाश साहू तथा डॉ. ममता सोनी ने भी अपने विचार रखे।