उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान में सावन मास में चल रही ‘अपनों से अपनी बात भोलेनाथ के साथ’ शिव कथा में शनिवार को संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने शिव महिमा का मार्मिक वाचन किया।

उन्होंने कहा कि शिव कथा का रसपान करने वाले को परम आनंद की प्राप्ति होती है।

शिव भक्ति मनुष्य को संयम, करुणा और आत्मबल का मार्ग दिखाती है।कथा में उन्होंने शिव पूजा-अर्चना की महिमा बताते हुए हिमालयराज हिमवान और माता मैना की तपस्या, पार्वती जन्म, नारद संवाद, माता पार्वती की तपस्या तथा देवगण-कामदेव संवाद का प्रसंग सुनाया।

इसके बाद कामदेव वध की कथा भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत की।उन्होंने कहा कि भगवान शिव के तीसरे नेत्र के खुलते ही कामदेव भस्म हो गए। यह प्रसंग आज के आधुनिक जीवन में भी प्रासंगिक है।

कामदेव यहां असंयम, लालसा और विकारों के प्रतीक हैं। जब मनुष्य अपने भीतर ज्ञान और विवेक का तीसरा नेत्र खोलता है, तो वह मोह और विकारों पर विजय पा सकता है।अग्रवाल ने कहा कि शिव का संदेश है कि इच्छाओं को विवेक और संयम से दिशा देना ही जीवन की सच्ची साधना है।

कथा के दौरान श्रद्धालु और दिव्यांगजन शिव भक्ति में भावविभोर रहे तथा पूरा वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।