उदयपुर | राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी एवं प्रदेश महामंत्री इंजी. अरविंद कौशल ने राजस्थान के पाँचों कृषि विश्वविद्यालयों की कथित वित्तीय बदहाली, पेंशनर्स को नियमित पेंशन एवं अन्य पेंशनरी लाभ नहीं मिलने तथा विश्वविद्यालयों में आवश्यक पदों के बावजूद गंभीर staff shortage को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।

महासंघ ने कहा कि जब विश्वविद्यालय अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की नियमित pension liability तक पूरी करने की स्थिति में नहीं हैं और आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, तब उनकी Financial Sustainability, Governance और ICAR Accreditation पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।

प्रदेशाध्यक्ष इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि पेंशन किसी सरकार की कृपा नहीं बल्कि कर्मचारी की वर्षों की सेवा से अर्जित वैधानिक/स्वीकृत देयता है।

उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार यदि कृषि विश्वविद्यालयों को सार्वजनिक एवं महत्वपूर्ण राज्य संस्थान मानती है तो इन विश्वविद्यालयों को पर्याप्त funding, आवश्यक staff और pension liabilities के लिए स्थायी budgetary provision देना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने सवाल किया कि जो विश्वविद्यालय अपने retired employees को नियमित पेंशन देने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं, वे उच्च कृषि शिक्षा के राष्ट्रीय standards को किस आधार पर पूरा करेंगे?

प्रदेश महामंत्री इंजी. अरविंद कौशल ने कहा कि सरकार अब कागजी दावों के बजाय पाँचों कृषि विश्वविद्यालयों की वास्तविक financial position जनता के सामने रखे।

प्रत्येक विश्वविद्यालय की कुल pension liability, मासिक pension requirement, लंबित retirement dues, government grant, salary expenditure, sanctioned posts और working तथा vacant posts का वास्तविक विवरण सार्वजनिक होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि यह आंकड़े सामने आते हैं और लगातार financial deficit तथा pension liabilities के भुगतान में असमर्थता दिखाई देती है, तो इसे सामान्य प्रशासनिक कठिनाई नहीं बल्कि गंभीर Financial Crisis के रूप में देखना होगा।

महासंघ के पाँचों प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र कुमार भटनागर (उदयपुर), डॉ. आर.एस. चावड़ा (जोधपुर), डॉ. अरुण कुमार शर्मा (कोटा), श्री मनफूल मंग्लिया (बीकानेर) एवं श्री मूलचंद जाट (जोबनेर) ने संयुक्त रूप से कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों की वास्तविक institutional strength केवल भवन, पाठ्यक्रम और कागजी उपलब्धियों से तय नहीं होती।

पर्याप्त financial resources, qualified faculty, आवश्यक manpower, sound governance और संस्थान की अपनी financial liabilities को समय पर पूरा करने की क्षमता भी उसकी संस्थागत मजबूती के महत्वपूर्ण संकेत हैं।

महासंघ के प्रदेश मंत्री डॉ. भारत सिंह भीमावत (जोधपुर), डॉ. भूपेन्द्र उपाध्याय (उदयपुर), इंजी. मोहनलाल चांगवाल (जोबनेर) एवं श्री महावीर शर्मा (कोटा) ने कहा कि एक तरफ ICAR Accreditation 2026 की तैयारी हो रही है और दूसरी तरफ विश्वविद्यालयों में गंभीर staff shortage तथा pension एवं retirement liabilities का संकट बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि इन दोनों वास्तविकताओं को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। यदि पर्याप्त faculty और financial resources नहीं हैं तो इसका सीधा असर academic quality और accreditation score पर पड़ना स्वाभाविक है।

संगठन मंत्री इंजी. सुरेन्द्र भूषण सहाय (उदयपुर) ने कहा कि सरकार को पाँचों कृषि विश्वविद्यालयों की financial position पर तत्काल White Paper जारी करना चाहिए।

इसमें pension liability, pending pensionary dues, government funding, salary expenditure, sanctioned एवं vacant posts तथा पिछले पाँच वर्षों के budget और actual utilization का पूरा विवरण होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार आंकड़े छिपाने के बजाय जनता और ICAR के सामने विश्वविद्यालयों की वास्तविक स्थिति रखे।

प्रदेशाध्यक्ष इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी एवं प्रदेश महामंत्री इंजी. अरविंद कौशल ने कहा कि ICAR की अपनी accreditation guideline में agricultural higher education की quality के संबंध में faculty shortage, insufficient fund, sub-optimal infrastructure और poor governance को गंभीर चिंताओं के रूप में चिन्हित किया गया है।

ICAR ने accreditation के लिए score-card आधारित व्यवस्था अपनाई है, जिसमें विभिन्न criteria और उनके predetermined weightage के आधार पर विश्वविद्यालयों का assessment किया जाता है।

विशेष रूप से Financial Resource Management को 200 अंक दिए गए हैं।

इसमें budget allocation, Finance Committee, internal resource generation, external funding, financial delegation तथा पिछले पाँच वर्षों के finance utilization जैसे महत्वपूर्ण financial parameters शामिल हैं।

इसलिए किसी University की वास्तविक financial capacity, उपलब्ध resources और उनका उपयोग accreditation assessment का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रदेशाध्यक्ष इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी एवं प्रदेश महामंत्री इंजी. अरविंद कौशल का कहना है कि गंभीर financial crisis और severe staff shortage के रहते पाँचों कृषि विश्वविद्यालयों के लिए accreditation के आवश्यक marks हासिल करना गंभीर रूप से चुनौतीपूर्ण है।

यदि इन विश्वविद्यालयों में पर्याप्त faculty/manpower नहीं है और financial resources इतने अपर्याप्त हैं कि pension तथा अन्य retirement liabilities भी समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं, तो ICAR की निर्धारित quality और financial standards के संदर्भ में इनकी वास्तविक स्थिति का कठोर और निष्पक्ष assessment होना चाहिए।

प्रदेशाध्यक्ष इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी एवं प्रदेश महामंत्री इंजी. अरविंद कौशल ने कहा कि अब राजस्थान सरकार को यह तय करना होगा कि वह इन पाँचों कृषि विश्वविद्यालयों को वास्तव में मजबूत सार्वजनिक संस्थानों के रूप में चलाना चाहती है या केवल कागजों पर उनकी व्यवस्था बनाए रखना चाहती है।

यदि सरकार विश्वविद्यालयों को चलाना चाहती है तो तुरंत पर्याप्त funding, pension provision और आवश्यक staff उपलब्ध कराकर Financial Crisis को Financial Stability में बदलना होगा।

प्रदेशाध्यक्ष इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी एवं प्रदेश महामंत्री इंजी. अरविंद कौशल ने कहा कि pension crisis यदि insufficient funds, staff shortage, कमजोर financial management और governance deficiencies का परिणाम है, तो ये सभी परिस्थितियां मिलकर University की overall institutional sustainability और accreditation performance को प्रभावित कर सकती हैं।

ICAR के आधिकारिक दस्तावेज स्वयं insufficient funds और faculty shortage को agricultural education की quality concerns में शामिल करते हैं।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन रोककर, आवश्यक पद खाली रखकर और financial resources की कमी के बीच विश्वविद्यालय चलाने की व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल सकती।

“न पर्याप्त पैसा, न पर्याप्त staff और न नियमित pension—फिर उच्च कृषि शिक्षा की गुणवत्ता और accreditation के national standards कैसे पूरे होंगे?” सरकार को इस सवाल का जवाब देना ही होगा।

प्रदेशाध्यक्ष इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी एवं प्रदेश महामंत्री इंजी. अरविंद कौशल ने दो टूक चेतावनी दी कि वित्तीय संकट को छिपाकर या केवल कागजी आंकड़ों के सहारे accreditation की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा।

ICAR की कसौटी पर विश्वविद्यालय की वास्तविक financial sustainability, manpower और governance की स्थिति सामने आनी चाहिए।

पाँचों कृषि विश्वविद्यालयों की Financial Position, Pension Liability और Manpower Position का तत्काल स्वतंत्र assessment कराया जाए, सभी लंबित pensionary dues के भुगतान के लिए पर्याप्त और स्थायी budget provision किया जाए, आवश्यक पदों पर staff की नियुक्ति की जाए तथा ICAR Accreditation 2026 के Self Study Report में विश्वविद्यालयों की वास्तविक वित्तीय एवं मानव संसाधन स्थिति को पारदर्शी रूप से प्रस्तुत किया जाए।

पाँचों कृषि विश्वविद्यालयों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन, आवश्यक मानव संसाधन और pension liabilities के लिए स्थायी प्रावधान देकर मजबूत किया जाए।

अन्यथा सरकार को इन विश्वविद्यालयों की वित्तीय viability और भविष्य पर कठोर एवं स्पष्ट निर्णय लेना होगा।

कृषि विश्वविद्यालयों को मजबूत बनाना है तो सरकार पैसा दे, staff दे और pension दे। यदि सरकार इन तीनों मूलभूत दायित्वों को पूरा करने में सक्षम नहीं है, तो उसे जनता को बताना चाहिए कि इन विश्वविद्यालयों को वर्तमान स्वरूप में चलाने का औचित्य क्या है।