माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर द्वारा तथ्यों को सही बताने पर सांसद ने मुख्यमंत्री को लिखा था पत्र
उदयपुर। स्कूली कक्षाओं की पुस्तकों में इतिहास संबंधी गलतियां प्रकाशित करने और वामपंथी विचारधारा को आगे बढाने को लेकर सांसद डॉ मन्नालाल रावत की ओर की गई आपत्ति पर शिक्षा विभाग ने कक्षा 9 से 12 तक की चार पुस्तकों को शैक्षिक सत्र 2026-27 में विलोपित करने तथा विद्यालयो में इसका अध्ययन नहीं कराने के निर्देश जारी किए हैं।
उपनिदेशक समाज शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर की ओर से राज्य के समस्त मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी एवं पदेन जिला परियोजना समन्वयक, समग्र शिक्षा को इस आशय का पत्र भेजा गया है। पत्र में बताया गया है कि शैक्षिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9 में पढाई जा रही पुस्तक राजस्थान का स्वतंत्रता आंदोलन एवं शौर्य परम्परा हिन्दी व अंग्रेजी माध्यम, कक्षा 10 की पुस्तक राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति हिन्दी व अंग्रेजी माध्यम, कक्षा 11 की पुस्तक आजादी के बाद का सवर्णिम भारत भाग-1 हिन्दी व अंग्रेजी माध्यम तथा कक्षा 12 में पढाई जा रही पुस्तक आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत भाग-2 हिन्दी अंग्रेजी व माध्यम को विलोपित कर दिया गया है इसलिए विद्यालयों में इन पुस्तकों का अध्ययन नहीं करवाया जाए।
सांसद डॉ रावत ने राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मण्डल, जयपुर द्वारा कक्षा 9 के लिए प्रकाशित पुस्तक राजस्थान का स्वतंत्रता आंदोलन एवं शौर्य परम्परा को लेकर विशेष आपत्ति की थी और इस पुस्तक के अध्याय 4 पृष्ठ नम्बर 42 में अंकित तथ्यों में संशोधन के लिए आग्रह किया था। सांसद डॉ रावत द्वारा की गई आपत्ति के बाद भी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर द्वारा उक्त प्रकाशित अंश को सही बताया गया है एवं संशोधन की आवश्यकता नहीं बताई है। इसको लेकर सांसद डॉ रावत ने गंभीर आपत्ति दर्ज करवाई तथा तथ्यों सहित मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। सांसद ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर की टिप्पणी पूर्णतया असत्य होकर वामपंथी विचारधारा से प्रेरित है। लेखक मंडल द्वारा दी गई राय में कई भ्रामक टिप्पणियों का उपयोग किया है।
सांसद डॉ रावत ने कहा कि बोर्ड द्वारा यह बताया कि इतिहासविद् डॉ. बृजकिशोर शर्मा द्वारा वर्ष 2001 में प्रकाशित राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर के पृष्ठ संख्या 42 एवं 54 से उक्त तथ्य लिए है। जबकि वर्ष 2001 में राज्य में कांग्रेस की सरकार थी एवं इस तरह के तथ्य तत्कालीन सरकार के कालखण्ड में जानबूझकर पाठ्यक्रमों में सम्मिलित किए गये थे। बहुसांस्कृतिक राष्ट्र एवं उपराष्ट्रीयताएं जैसे आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग भारतीय राष्ट्रवादी भावना के विपरीत होकर पूर्णतया वामपंथी विचारधारा से प्रेरित है। ऐसी शब्दों के माध्यम से लेखक मंडल ने अपना नैरेटिव स्थापित करने का प्रयास किया। झारखण्ड मुक्ति मोर्चा की तुलना संत गोविन्द गुरु जी के स्वतन्त्रता आन्दोलन से की गई हैं, जो कालखण्ड के अनुरूप नहीं है। झारखण्ड मुक्ति मोर्चा का आन्दोलन स्वतन्त्रता के बाद का आन्दोलन है जिसकी तुलना मानगढ़ धाम के स्वतन्त्रता आन्दोलन से कदापि नहीं की जा सकती है। विभिन्न आपत्तियों के बाद आखिरकार गुरुवार को चार पुस्तकों को शिक्षा विभाग ने विलोपित करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
Udaipur
सांसद डॉ रावत की आपत्ति के बाद नवीं से बारहवीं तक की चार पुस्तकों को शिक्षा विभाग ने इस सत्र से हटाया
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