उदयपुर। राजकीय सार्वजनिक जिला पुस्तकालय एवं सलिला संस्था सलूम्बर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। जिसमें दिल्ली, डूंगरपुर और सलूम्बर के साहित्यकारों ने भाग लिया। इसका लाभ 60 से 70 विद्यार्थियों को मिला। प्रचंड गर्मी के बावजूद श्रोताओं ने बड़े उत्साह से कार्यक्रम में सहभागिता की। बालिकाओं ने रंगोली बनाई और बालको ने गुब्बारों से उसे पुस्तकालय भवन को सजाया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एनसीईआरटी दिल्ली की डॉ पूनम अग्रवाल ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया उन्होंने कहा कि, ‘पुस्तकें अविनाशी है, मोबाइल विनाशी है। मुद्रित पुस्तक हजारों साल तक अपने इस स्वरूप में विद्यमान रह सकती हैं जबकि मोबाइल में सामग्री डिलीट हो जाए तो कुछ नहीं बचता। यदि सामग्री का वर्जन बदल जाए तो वह खुलता नहीं और फाइल करप्ट हो जाती है या खो जाती है तो हम हाथ मलते रह जाते हैं किंतु पुस्तक तो प्रत्यक्ष रूप में साथ निभाती है। उन्होंने पुस्तक और मोबाइल तथा अन्य डिजिटल माध्यम के बीच तुलनात्मक अध्ययन को प्रस्तुत किया। उन्होंने राजकीय सार्वजनिक जिला पुस्तकालय सभागार में उपस्थित प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को जीवन में और परीक्षा में सफल होने के कुछ सूत्र दिए। उनका पहला सूत्र था- सफल होने के लिए स्वयं को समय दें। दूसरा सूत्र था- सफल लोगों के बारे में पढ़े और उनके सफल होने के राज को जाने। तीसरा सूत्र- हार को स्वीकार करें, हार से सीखाती है। हार को जीत में बदलना सीखें। चौथा सूत्र- लक्ष्य को बनाए और उसमें लचीलापन रखें। पांचवा सूत्र- बदलाव के साथ ढले और यूनिक बनें। अपने स्वयं में आत्मविश्वास जगाएं। हां, तुम उड़ सकते हो। अपने पंखों को मत समेटे, अपनी आंखों में खिलने दो अमलतास... कविता के माध्यम से अपनी बात कही।
अध्यक्ष, सलिला संस्था, सलूम्बर डॉ विमला भंडारी ने बताया कि विश्व पुस्तक दिवस समारोह का पहला दिन 23 अप्रैल को बाल कविता लेखन प्रतियोगिता करवायी गयी। पुरस्कार विजेता 13 बालकों को पुरस्कार की नगद राशि के साथ पुस्तकें और स्मृति चिह्न प्रदान किया गया। विजेता बालकों को मंच से अपनी रचना की प्रस्तुति करने का अवसर भी मिला। इस अवसर पर कार्यक्रम प्रभारी मुकेश राव एवं विद्यालय के अध्यापक मौजूद थे।
कार्यक्रम का आरम्भ मां सरस्वती को दीप प्रज्ज्वलन के बाद अतिथियों के स्वागत के साथ आरंभ हुआ। शॉल माल, उपरना और स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। कार्यक्रम के संयोजक पुस्तकालय अध्यक्ष प्रकाश शर्मा ने सबका स्वागत किया। डॉ विमला भंडारी ने अतिथियों का परिचय कराते हुए पुस्तक के महत्व को प्रतिपादित किया। इसके संदर्भ में उन्होंने “सलूम्बर का इतिहास” पुस्तक के योगदान के उदाहरण प्रस्तुत किए। साथ ही कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। संचालन मधु माहेश्वरी ने किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डूंगरपुर के दिनेश पंचाल ने कहा कि सद्साहित्य की पुस्तकें हमारे मित्र हैं, परन्तु गुमराह करने वाली निम्न स्तर की पुस्तकें शत्रु है जो गलत रास्ते पर ली जाती हैं। अपनी विवेक से अच्छी पुस्तकों को पहचाने और पुस्तकें चुनकर पढ़ें। इस संदर्भ में उन्होंने स्वामी विवेकानंद से जुड़ा हुआ एक प्रेरक प्रसंग सुनाया। जिसमें उन्होंने महाभारत पुस्तक की महानता को प्रतिपादित किया।
डूंगरपुर से आए कवि और चित्रकार कैलाश प्रेमी ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर अपना उद्बोधन दिया। विश्व पुस्तक दिवस समारोह को वरिष्ठ नागरिक शिवनारायण आगाल संबोधित किया। आभार की रस्म जगदीश भंडारी ने निभायी। बालिकाओं में से मंच पर काव्या भंडारी, किरण दमामी ने प्रस्तुती दी। शंकर लाल पांडे, स्नेहलता भंडारी ने सलिला संस्था का संस्था गीत एवं हाड़ीरानी पर गीत प्रस्तुत किया। सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल भगवान लाल त्रिवेदी, सेवानिवृत अध्यापक श्यामलाल सोनी और सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक रमेश कचोरिया इत्यादि गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
Udaipur
दो दिवसीय विश्व पुस्तक दिवस समारोह का समापन
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