उदयपुर | जनमत मंच द्वारा विश्व विरासत दिवस की पूर्व संध्या पर ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर जनमत मंच के संस्थापक, अध्यक्ष डॉ.श्रीनिवास महावर ने बताया कि-
किसी भी राष्ट्र का इतिहास, उसके वर्तमान और भविष्य की नींव होता है। जिस देश का इतिहास जितना गौरवमयी होगा, वैश्विक स्तर पर उसका स्थान उतना ही ऊँचा माना जाता है। वैसे तो बीता हुआ कल कभी वापस नहीं आता, लेकिन उस काल में बनीं इमारतें और लिखे गए साहित्य उन्हें हमेशा सजीव बनाए रखते हैं। विश्व विरासत के स्थल किसी भी राष्ट्र की सभ्यता और उसकी प्राचीन संस्कृति के महत्त्वपूर्ण परिचायक माने जाते हैं।
दुनिया भर में मौजूद ऐतिहासिक इमारतें,स्मारक और सांस्कृतिक धरोहर हमारी पहचान और इतिहास का अहम हिस्सा हैं। इन्हीं अनमोल धरोहरों को सुरक्षित रखने और उनके महत्व को समझाने के लिए हर साल 18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस (World Heritage Day) या अंतर्राष्ट्रीय स्मारक और स्थल दिवस मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य पूरे विश्व में मानव सभ्यता से जुड़े ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्मारकों और स्थलों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
इसकी शुरुआत 1982ई.में 'इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स' (ICOMOS) द्वारा की गई थी और 1983ई.में यूनेस्को (UNESCO) की आम सभा द्वारा इसे आधिकारिक रूप से मान्यता दी गई थी।
आज के दौर में तेजी से हो रहे शहरीकरण और प्रदूषण के कारण कई ऐतिहासिक स्थल खतरे में हैं। ऐसे में यह दिन और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। स्कूल, कॉलेज और कई संस्थाएं इस दिन पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती हैं, ताकि लोग अपनी विरासत को बचाने के लिए आगे आएं।
उद्देश्य:
• सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा और संरक्षण को बढ़ावा देना।
• विश्वभर में ऐतिहासिक इमारतों, स्मारकों और स्थलों के महत्व को समझाना।
• धरोहर स्थलों को नुकसान पहुँचाने वाले खतरों के बारे में जागरूक करना।
• युवा पीढ़ी में विरासत के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना।
इन धरोहर स्थलों को 3 श्रेणियों में शामिल किया गया है।
• सांस्कृतिक धरोहर स्थल- ऐसे स्थल जो ऐतिहासिक , सांस्कृतिक अथवा कलात्मक दृष्टि से महत्त्व रखते हैं ,
• प्राकृतिक धरोहर स्थल- ऐसे स्थल जो पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं ,
• मिश्रित धरोहर स्थल- ऐसे स्थल जो दोनों पर्यावरण व पौराणिकता की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
2026 की शुरुआत तक, यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में कुल 1,248 स्मारक और स्थल शामिल हो चुके हैं। जुलाई 2025 में पेरिस में आयोजित 47 वें सत्र के दौरान 26 नए स्थलों को जोड़ने के बाद यह संख्या 170 देशों में 1,248 तक पहुंच गई है। केवल भारत में, 2026 तक कुल 44 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं।
भारत में विश्व धरोहर स्थलों पर प्रकाश डालते हुए बताएं कि -
ये सांस्कृतिक, प्राकृतिक और मिश्रित श्रेणियां में विभाजित है।
आरम्भ में घोषित:
◦ अजंता गुफाएं (महाराष्ट्र), 1983
◦ एलोरा गुफाएं (महाराष्ट्र), 1983
◦ होयसला मंदिर समूह – बेलूर, हलेबिड और सोमनाथपुर (कर्नाटक) 2023
◦ शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल) 2023
◦ हाल ही में घोषित:
◦ मोईदाम – (2024): असम की अहोम राजवंश की दफन प्रणाली को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है।
. मराठा सैन्य परिदृश्य (2025): इसे भी हाल ही में इस सूची में जोड़ा गया है।
भारत विश्व धरोहर स्थलों की संख्या के मामले में विश्व में छठे स्थान पर है।
भारत में अप्रैल 2026 तक 44,यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। जिममें 36 सांस्कृतिक स्थल: (जैसे- ताजमहल, लाल किला) 7 प्राकृतिक स्थल: (जैसे- काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) 1 मिश्रित स्थल: (कंचनजंगा नेशनल पार्क) आदि।
जिन्हें इस दिन विशेष रूप से याद किया जाता है।
इस अवसर पर कई ऐतिहासिक स्थानों पर नि:शुल्क प्रवेश की सुविधा और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
यह दिवस सांस्कृतिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाकर अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और जीडीपी में वृद्धि होती है। साथ ही,यह विरासत स्थलों के संरक्षण के माध्यम से टिकाऊ पर्यटन (Sustainable Tourism) को प्रोत्साहित करता है।
मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर ने कहा की मध्य एवं आधुनिक काल की भांति मेवाड़ का प्राचीन इतिहास भी गौरवशाली रहा है। इसकी पुष्टि उदयपुर के समीपवर्ती क्षेत्रों से प्राप्त पुरातात्विक सम्पदा से होती है।
जैसे पुराने महल, किल्ले ,बावड़ियों ,सिक्के ,पट्टे,परवाने, मंदिर,तालाब को चिनिहित कर उन्हें संरक्षित करना आवश्यक है क्योकि इतिहास लेखन मैं इन स्थानों पर लगे शिलालेख ,ताम्रा पत्र ,पट्टे मूल सामग्री होती है। मेवाड़ क्षेत्र के कुछ अग्रणी इतिहासकार जैसे गौरीशंकर हीराचंद ओझा, कविराज श्यामलदास,जेम्स टॉड द्वारा खोजे गए। आहाड,बालाथल ,ईसवाल,गिलूण्ड जैसे अनेक स्थानों को प्रकाश में लाया गया है।इससे यह जानकारी मिलती है की यह क्षेत्र पाषाणकाल से ही ऐतिहासिक धरोहर के रूप में अपना योगदान दे रहे है। ऐतिहासिक ,सांस्कृतिक एवं प्राकृति विरासत न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को हमारे अतीत से जोड़ती है।
आज आवश्यकता इस बात की है की औद्योगिक नगरीय विकास के चलते हुए पुरासम्पदा के संरक्षण एवं अध्य्यन हेतु राजकीय स्तर पर निति निर्धारण कर विभिन्न शैक्षणिक संस्थाए एवं सामाजिक संगठनो को उत्तरदायित्व वहन कर जन चेतना विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।
इस अवसर पर मंच के सह सचिव डॉ. प्रियदर्शी ओझा, सहायक सचिव विनोद कुमार चौधरी, धर्मेंद्र कुमार वर्मा ,एवं डॉ. कुणाल आमेटा ने बताया कि हर साल विश्व विरासत दिवस एक खास थीम के साथ मनाया जाता है। 2026 की थीम है, संघर्षों और आपदाओं के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया। (Emergency Response for Living Heritage in the Context of Conflicts and Disasters) इस थीम का मतलब है कि युद्ध, आपदा या किसी संकट के समय हमारी सांस्कृतिक धरोहरों, जैसे पुराने मंदिर, इमारतें और परंपराएं को कैसे बचाया जाए। इसका फोकस सिर्फ नुकसान होने के बाद सुधार करने पर नहीं, बल्कि पहले से तैयारी करने पर है।
अपनी विरासत को बचाने के लिए छोटे-छोटे कदम उठा सकते हैं। जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर गंदगी न फैलाना, उनकी देखभाल करना और दूसरों को भी जागरूक करना। यही छोटे प्रयास बड़े बदलाव ला सकते है। इस अवसर पर रिशु ओझा द्वारा धरोहर पर कविता प्रस्तुत की गयी।
Udaipur
ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण आवश्यक-डॉ. श्रीनिवास महावर
Related stories
Independence Day Celebrations Held with Great Enthusiasm
Sri Ganganagar: The main Independence Day समारोह was held with great enthusiasm on Saturday, August 15, 2026,…
Independence Day Celebrations Held with Great Enthusiasm
Sri Ganganagar: The main Independence Day Held was held with great enthusiasm on Saturday, August 15, 2026, a…
80th Independence Day Celebrated at Maharana Mewar Vidya Mandir
The 80th Independence Day was celebrated with great enthusiasm at Maharana Mewar Vidya Mandir, Ambamata, Udai…
80th Independence Day Celebrated with Patriotic Fervour at Maharana Mewar Public School, Udaipur
The 80th Independence Day was celebrated with great enthusiasm and patriotic spirit at Maharana Mewar Public…