उदयपुर | उदयपुर शहर के 475 वें स्थापना दिवस पर लोकजन सेवा संस्थान की ओर से दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ आज प्रातः उदयापोल स्थित महाराणा उदय सिंह की आदमकद प्रतिमा का डॉ विमल शर्मा द्वारा मंत्रोच्चार के बीच दिलीप रावत व भव्य प्रताप सिंह द्वारा पंचगव्य स्नान करने से हुआ।
पुष्पांजलि कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व कुलपति प्रोफेसर उमा शंकर शर्मा ने की, मुख्य वक्ता इतिहासकार श्रीकृष्ण जुगनू, डॉ राजेंद्र पुरोहित रहे।
श्रीकृष्ण जुगनू ने कहा कि मेवाड़ में तीन योग- जल स्थापत्य, देव स्थापत्य, मानव स्थापत्य की सदैव अनुपालना हुई। उदयपुर शहर की बसावट अपने आप में अनुपम है जिसमें ओल, पोल, टिब्बा, सेहरी, मकान के साथ बाड़ी, बाबड़ी आदि विरासत के मूल स्वरूप को बनाए रखना नितांत अवश्य है।
डॉ राजेंद्र नाथ पुरोहित ने बताया कि पूर्व में उदिया पोल केवल विशेष परिस्थिति में आवागमन के लिए ही खोला जाता था, इसका नाम कमलिया पोल हुआ करता था व महाराणा सज्जन सिंह के पुत्र रत्न प्राप्ति पर इसका नाम उदिया पोल रख एक आम रास्ते के रूप में खोला गया।
प्रोफेसर राव गोविंद सिंह भारद्वाज ने कहा कि महाराणा उदय सिंह जी ने मुगलों के आतंक को कुचलने के लिए तत्कालीन विदेशी भूवैज्ञानिकों से सलाह लेकर सबसे सुरक्षित व प्राचीन अरावली पर्वत श्रृंखला में कठोर चट्टानों के बीचोंबीच अनेकों कंदराओं व गुफाओं से सुसज्जित स्थान उदयपुर को चुना। इसमें लगभग तीस हजार प्राकृतिक जल संचय स्थान कंदराओं में, कंदराओं के मुंह पर, पतले दर्रों में दोनों ओर पहाड़ों व जंगलों से आच्छादित स्थान है ।
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए 
प्रोफेसर उमा शंकर शर्मा ने उदयपुर शहर के दोनों ओर से होने वाली नदी जल आवक, संग्रहण तथा उसका निकासी बाद 
गंगा में विलय तक का विवरण प्रस्तुत किया।
संस्थान अध्यक्ष प्रोफेसर विमल शर्मा ने स्वरचित कविता पेश करते हुए प्रसिद्ध इतिहासकार के सूत्र से बताया कि अनेक प्राचीन वस्तु ग्रंथों में चैत्र मास की स्थापना को विनाशकारी लिखा बताया है इसके मद्देनजर चैत्र में उदयपुर स्थापना संभव नहीं है जैसा की कतिपय भ्रम है ।
प्रकाश अग्रवाल ने मेवाड़ के युग पुरुषों की प्रतिमा लगा उनकी नियमित साज सज्जा बनाए रखने पर बल दिया।
कार्यक्रम का संचालन जय किशन चौबे ने किया व डॉ मनीष श्रीमाली ने सभी का आभार व्यक्त किया।
पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में प्रमुख प्रोफेसर उमाशंकर शर्मा, श्रीकृष्ण जुगनू,  प्रोफेसर गोविंद भारद्वाज, संस्थान अध्यक्ष प्रोफेसर विमल शर्मा,  महासचिव जय किशन चौबे, डॉ राजेंद्र पुरोहित,  ग्रुप कैप्टन गजेंद्र सिंह, डॉ जयराज आचार्य,  डॉ रमाकांत शर्मा, इंद्र सिंह राणावत , मनोहर लाल मूंदड़ा, संध्या रावल, श्रीरत्न मोहता, ओम राठौड़,  गोविंद शर्मा, मनीष गोलछा,  प्रकाश अग्रवाल, डॉ मनीष श्रीमाली, दिलीप रावत, ओम प्रकाश माली, सुरेश तंबोली, भव्य प्रताप सिंह, गोविंद ओड, चंद्र प्रकाश चित्तौड़ा सहित अन्य उपस्थित रहे।
कल मंगलवार 21 को दूसरे दिन के कार्यक्रम में 11बजे विद्यापीठ में उदयपुर की संस्कृतिक विरासत पर संगोष्ठी का आयोजन होगा।