उदयपुर | विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर जनमत मंच के संस्थापक,अध्यक्ष डॉ. श्रीनिवास महावर ने जानकारी देते हुए बताया कि किताबें एक ऐसी खिड़की की तरह हैं जो हमें दूसरी दुनिया में ले जाती हैं – हर नए पन्ने के साथ, वे हमें नए लोगों,नई संस्कृतियों और नए विचारों से परिचित कराती हैं। यूनेस्को द्वारा विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस मनाता है,जो पीढ़ियों और संस्कृतियों के बीच सेतु के रूप में किताबों की शक्ति को मान्यता देता है।
विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस ज्ञान, संस्कृति और पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने वाला एक वैश्विक उत्सव है। यह दिन प्रसिद्ध लेखकों को याद करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है। जैसे
विलियम शेक्सपियर (William Shakespeare): अंग्रेजी के महानतम नाटककार और कवि, जिनका निधन 23 अप्रैल 1616 को हुआ था।
मिगुएल डे सर्वेंट्स (Miguel de Cervantes): प्रसिद्ध स्पेनिश लेखक, जिनके उपन्यास 'डॉन क्विक्सोट' को विश्व साहित्य में प्रमुख माना जाता है।
इंका गार्सिलासो डे ला वेगा (Inca Garcilaso de la Vega): प्रसिद्ध स्पेनिश इतिहासकार और लेखक।
23 अप्रैल को व्लादिमीर नाबोकोव (Vladimir Nabokov),मॉरिस ड्रुअन (Maurice Druon),हल्डोर लैक्सनेस (Halldór Laxness),मैनुअल मेजिया वैलेजो (Manuel Mejía Vallejo) जैसे प्रसिद्ध साहित्यकारों की भी सालगिरह होती है |
यूनेस्को (UNESCO) ने 1995 ई. में पहली बार 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस के रूप में घोषित किया था। इसका मुख्य उद्देश्य पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना, पुस्तकों और साहित्यकारों को सम्मानित करना और कॉपीराइट के माध्यम से बौद्धिक संपदा की रक्षा करना है।
किताबें न केवल ज्ञान देती हैं, बल्कि तनाव कम करती हैं और हमारी कल्पना को उड़ान देती हैं।
विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस के उपलक्ष्य में, प्रतिवर्ष यूनेस्को और पुस्तक उद्योग के प्रमुख क्षेत्रों प्रकाशकों, पुस्तक विक्रेताओं और पुस्तकालयों – का प्रतिनिधित्व करने वाले अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा एक विश्व पुस्तक राजधानी का चयन किया जाता है। चयनित शहर मेज़बान देश और उससे बाहर, सभी आयु वर्ग के लोगों और समाज के सभी वर्गों के बीच पुस्तकों और पठन-पाठन को बढ़ावा देता है।
आज तक, यूनेस्को ने 2001 में स्पेन के मैड्रिड से लेकर 2026 में मोरक्को के रबात तक 26 विश्व पुस्तक राजधानियों को नामित किया है।
दिल्ली एवं अन्य प्रदेशो में पुस्तक मेले आयोजित किये जाते है जिनका उद्देश्य पुस्तक पठान को बढ़ावा देना है |
इस अवसर पर मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर कहा की पुस्तकें ज्ञान का वाहक हैं जो पीढ़ियों को जोड़ती हैं, सभ्यताओं की स्मृतियों को संजोती हैं और समाज को दिशा देती हैं। आज आवश्यकता इस बात की है की डिजिटल युग में ज्ञान को सुलभ और समावेशी बनाना है, जहां भाषा बाधा नहीं बल्कि सेतु बने । सरकार द्वारा राष्ट्र निर्माण में पुस्तकों एवं पांडुलिपियों को विरासत के रूप में संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है | विद्यार्थियों से आव्हान है की अच्छी पुस्तकों से जुड़कर शोध की उचाईयो तक पहुंचना चाहिए |
विषय पर जानकारी देते हुए सह सचिव डॉ.प्रियदर्शी ओझा ने कहा की पुस्तके हमारी धरोहर है एवं हमे संरक्षित कर भावी पीढ़ी को इनके माद्यम से ज्ञान अर्जित करवाना चाहिए |
सहायक सचिव विनोद कुमार चौधरी, कोषाध्यक्ष विशाल माथुर, डॉ. कुणाल आमेटा,आजाद मीणा एवं धर्मेंद्र कुमार वर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि पुस्तकें हमें नई दुनिया,संस्कृतियों और विचारों से परिचित कराती हैं, इसलिए यह दिन हमें ज्ञान प्राप्त करने और साझा करने के लिए प्रेरित करता है।
Udaipur
पुस्तके ही शोध और नवाचार की आधारशिला :डॉ. श्रीनिवास महावर
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