डाॅ. चंपालाल गुप्त का जन्म हरियाणा के एक धर्मनिष्ठ, समाजसेवी अग्रवाल परिवार में वैद्य लक्ष्मीनारायण गुप्त के यहाँ हुआ। आपके पूज्य पिता एवं माताजी अत्यन्त धर्मपरायण एवं भगवान् श्रीकृष्ण की पावन लीलाओं के परम रसिक थे और प्रायः भगवान् की लीलास्थली वृन्दावन में ही वास करते थे। उनके धार्मिक विचारों के फलस्वरूप डाॅ. गुप्त में श्रीमद्भागवत, रामायण आदि धार्मिक ग्रन्थों के स्वाध्याय, मनन एवं लेखन की प्रवृत्ति प्रारम्भ हुई।
आप अग्रवाल समाज के राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व्यक्तित्व, लेखक एवं साहित्यकार हैं।
आप वर्षों तक 'अग्रोहा विकास ट्रस्ट' द्वारा प्रकाशित 'अग्रोहाधाम' पत्रिका के मानद सम्पादक रहे हैं और आपकी 'अग्रोहा - एक ऐतिहासिक धरोहर', 'अग्रोहा की कहानी', 'शेरे पंजाब लाला लाजपत राय' जैसी अनेक कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं।
आपके लेख भी समय-समय पर विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। आप 'महाराजा अग्रसेन अध्ययन संस्थान' के शोध निदेशक एवं 'सेठ द्वारिकाप्रसाद राष्ट्रीय पुरस्कार समिति' के संयोजक हैं।
आपने पूज्य पिताजी की स्मृति में 'वैद्य लक्ष्मीनारायण गुप्त स्मृति-संस्थान' की स्थापना की है, जो समय-समय पर विभिन्न लोकोपकारी कार्यों का सम्पादन करता रहता है। आपने गौसेवा, संरक्षण-संवर्धन हेतु भारत के प्रथम 'वैद्य लक्ष्मीनारायण गुप्त राष्ट्रीय गो सेवा पुरस्कार' की भी स्थापना की है।
आप 'अग्रोहा विकास ट्रस्ट', 'अ.भा. धर्मसंघ', 'राजस्थान बनवासी कल्याण परिषद्', 'श्री गौशाला' आदि अनेक सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं से सम्बन्धित हैं और आपको विभिन्न सामाजिक एवं अन्य सेवाओं हेतु 'अग्रोहा विकास ट्रस्ट', 'अ.भा. अग्रवाल सम्मेलन', 'अ.भा. धर्मसंघ', राज्य प्रशासन एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
'अग्रोहा विकास ट्रस्ट' ने आपको सन् 2005 में उत्कृष्ट सामाजिक सेवाओं हेतु एक लाख रुपये के सर्वोच्च 'महाराजा अग्रसेन राष्ट्रीय पुरस्कार' से सम्मानित किया है।
इससे पूर्व आप गुजरात के राज्यपाल डाॅ. स्वरूपसिंह द्वारा भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हो चुके हैं।
आप राजस्थान विश्वविद्यालय से 'सुमित्रानन्दन पन्त के काव्य में युगबोध' विषय पर शोध-उपाधि प्राप्त हैं और महर्षि दयानन्द स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष रहे हैं।
'श्री भागवत-कथामृत' आपकी नवीन कृति है, जिसमें श्रीमद्भागवत कथा को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया गया है।
आपकी 25 अगस्त को 85वीं वर्षगांठ पर देश के सम्पूर्ण अग्रवाल समाज, वैश्य समाज और श्रीगंगानगर के अग्रज आपको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए आपके स्वस्थ, निरोग एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना करते हैं। आपका स्नेह एवं आशीर्वाद सभी को सदैव की भाँति निरन्तर मिलता रहे। एक बार पुनः आपको एवं आपके पूरे परिवार को इस शुभ अवसर की बहुत-बहुत बधाई हो।