उदयपुर। आदिवासियों के बीच में अपना प्रभाव जमाने का दावा करते रहे बीएपी के सांसद राजकुमार रोत की जमीन निकाय चुनाव में ही खिसक गई। जहां वे अपना गढ बताने वाले डूंगरपुर-बांसवाडा व सागवाडा में भी नहीं जीत पाए। डूंगरपुर व सागवाडा में भाजपा का बोर्ड बना है।

डॉ मन्नालाल रावत को भाजपा एसटी मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद मेवाड़ वागड़ की आदिवासी अंचल में भाजपा की ताकत बढ़ी हुई दिखाई दे रही है।

पार्टी का उद्देश्य भी ये ही था कि आदिवासी इलाकों में भाजपा की ताकत मजबूत हो और आदिवासियों को भ्रमित कर रही बीएपी जैसी पार्टियांें की असलियत सबके सामने आए।

बीएपी के राजकुमार रोत लगातार दावा करते रहे हैं कि आदिवासी क्षेत्र में बीएपी का प्रभुत्व बढ रहा है। इसी मुगालते में उन्होंने उदयपुर नगर निगम चुनाव में भी अपने प्रत्याशी उतार दिए, जबकि उनमें से एक भी जीत नहीं पाया।

आश्चर्य की बात तो यह है कि वार्ड 13 में बीएपी के प्रत्याशी संतोष कटारा को मात्र 61 वोट मिले, जबकि इससे ज्यादा 77 वोट नोटा में डाले गए। बीएपी प्रत्याशी नोटा जितने वोट भी नहीं ला पाया।

स्थानीय निकाय चुनाव में डूंगरपुर में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला जहां डूंगरपुर नगरपरिषद एवं सागवाड़ा नगर पालिका में भाजपा का बोर्ड बन रहा है।

डूंगरपुर नगर परिषद चुनाव में भारत आदिवासी पार्टी के तीन प्रत्याशी विजय हुए और तीनों मुस्लिम है। वहां बीएपी के खाते से एक भी आदिवासी उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर पाया।

वहीं भारतीय आदिवासी पार्टी का कोई प्रभाव कम देखने को मिला।

बताया गया कि इन बदलती परिस्थितियों में डूंगरपुर के भारतीय आदिवासी पार्टी के जिला अध्यक्ष को कार्य मुक्त कर दिया गया है। इस चुनाव में सलूंबर, बांसवाड़ा व प्रतापगढ़ में भी भारत आदिवासी पार्टी कुछ विशेष नहीं कर पाई।