श्रीमद्भगवद्गीता व्यष्टि से लेकर समष्टि तक के जीवन लक्ष्यों और अस्तित्व को सिद्ध करने और वैश्विक महापरिवर्तन का सृजन करने की अपार और अद्भुत क्षमताओं से परिपूर्ण है। यह जीवन सुखद समृद्ध और भक्ति मय जीने की कला सिखाती हैं।

यह पिण्ड से लेकर ब्रह्माण्ड तक के स्पन्दनों और परिवेशीय कंपनों के माध्यम से परमाण्वीय प्रभावों का साक्षात्  दर्शन कराती है।

यह उद्गार आध्यात्मिक चिन्तक, विचारक एवं गीता मर्मज्ञ एच एच भक्ति आश्रय वैष्णव स्वामी महाराज ने इस्कॉन के बांसवाड़ा केन्द्र की ओर से अंकुर स्कूल में श्रीमद्भगवद्गीता और आध्यात्मिक जीवन सूत्रों पर कर्म योग विषयक आयोजित त्रिस्तरीय कार्यशाला सत्संग समागम में अपने व्याख्यान में व्यक्त किए। 

इसमें भक्तों ने सत्संग संकीर्तन और भजनों की माधुर्यपूर्ण प्रस्तुति से श्रीकृष्ण भक्ति के आनन्द का ज्वार उमड़ा दिया।

उक्त विचार अंकुर स्कूल में इस्कॉन केन्द्र बांसवाड़ा द्वारा सत्संग संकीर्तन भजन ओर जीवन सूत्रों की सरल व्याख्यान में आहूत कार्यशाला और धार्मिक समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में आध्यात्मिक चिन्तक, विचारक एवं गीता मर्मज्ञ एच एच भक्ति आश्रय वैष्णव स्वामी महाराज  ने प्रवचन में कहे।

 

*कर्मफल भोगना ही पड़ेगा, इसलिए पवित्र जीवन व्यवहार अपनाएं*

 

उन्होंने कर्म के प्रभाव और फल पर चर्चा करते हुए कहा कि यह दर्पण की तरह ही हमारे कर्मफल को जस का तस परावर्तित कर देता है। इसलिए विवेक बुद्धि से कर्म का निर्वाह करना चाहिए और इसमें भगवदीय भावों और पवित्र विचारों का समावेश करते हुए जगत और जीवन व्यवहार करना चाहिए। अनासक्त कर्मयोग को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया है। 

 

*ब्रह्माण्ड में सकारात्मक ऊर्जा संचार करें*

 

उन्होंने कहा कि हमारे कर्म परमार्थ की दिशा में होने पर सकारात्मक कम्पन देते हैं जबकि विपरीत कर्म का परिणाम अच्छा नहीं होता। हमें तय करना होगा कि अपने कर्म से ब्रह्माण्ड में किस प्रकार की ऊर्जा का प्रवाह उत्पन्न करें। क्योंकि यही लौट कर आते हैं और अपना प्रभाव दिखाते हैं।

 

श्रीमद्भगवद्गीता के मूल रहस्यों को उद्घाटित करते हुए गीता मर्मज्ञ एच एच भक्ति आश्रय वैष्णव स्वामी महाराज ने गीता के ज्ञान, भक्ति और कर्मयोग को अपनाना चाहिए। गीता के 18 अध्यायों और 700 श्लोक समूचे जीवन, जगत और धर्म-अध्यात्म का सार हैं।

 

उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को गुरु रूप में मानकर शरणागत भाव अपनाकर उनकी वाणी गीता को उनके मंत्र, उपदेश मानकर उनकी आज्ञानुसार साधन भजन में लग जाना चाहिए। 

 

*नृत्य एवं कीर्तन की गूंज आकर्षण का केन्द्र*

 

 कार्यशाला में वाद्ययंत्रों  के साथ भगवद्भक्तिमय नृत्य एवं कीर्तन की गूंज आकर्षण का केन्द्र रही

 

*21 दीपकों से महा आरती,*

*11 थालियों में महा भोग*

 

कार्यशाला में भगवान् योगेश्वर श्री जगन्नाथ, सुभद्रा और बलदेव के विग्रह के देवदर्शन किए 21 दीपकों से महा आरती 11 थालियों में महा भोग अर्पित किया गया।

 

*आरती विधान ओर अभिषेक दिव्य सुगन्धित इत्रों से किया*

 

इस अवसर पर उदयपुर,अहमदाबाद से आए इस्कॉन प्रतिनिधि मण्डल की ओर से उज्जवल प्रभु के सानिध्य में सुगन्धित द्रव्यों से भगवान् योगेश्वर श्री जगन्नाथ माता सुभद्रा जी, बलभद्र के विग्रह को विशेष मुकुट पहना कर आरती विधान अभिषेक दिव्य सुगन्धित इत्रों से किया गया।

 

*श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर अभिनन्दन*

 

आरंभ में शहर के कई साधक-साधिकाओं श्रद्धालुओं को उपरणा ओढ़ाकर स्वागत किया तथा श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर अभिनन्दन किया।

 

*प्रह्लाद स्कूल के छोटे बच्चों का नृत्य सभी ने सराहा*

 

इस अवसर पर प्रह्लाद स्कूल के बच्चों ने भावविभोर होकर विश्व आत्मा दास प्रभु और प्रभारी श्रीमति हिमानी पाठक के नेतृत्व में कृष्ण भक्ति भाव से भजनों पर श्रद्धालुओं साधक साधिकाओं के साथ नृत्य किया।

 

*दिव्य पूजन-अर्चन विधान*

 

इस अवसर पर दिव्य सुगन्धित द्रव्यों से भगवान श्री योगेश्वर श्री कृष्ण भावनामृत भक्ति साधना सत्संग संकीर्तन भजन द्वारा अभय गौरांग दास,अभिनंदन निमाई प्रभु, दिव्य आत्मा दास ,श्रीमति चन्द्र कांता माताजी, साधिका श्रीमति रचना व्यास द्वारा पूजा विधान अभिषेक सम्पन्न कराया गया।

 

कार्यशाला में मानस, अजय रौनक, कुशल, चैतन्य, डिम्पल, मनोज मूंदड़ा,  सुनील, सुरेश, नैमिष, निखिल, नीरज पाठक, शाबुनी, दीपिका, विभा, अर्चना, अनिता, हिमानी पाठक, कृपाली भट्ट, दक्षा प्रभु के सपरिवार सहित अगवानी की गई।

 

इस अवसर पर श्रीमति चंद्रकांता वैष्णव की अगुवाई में डिंपल , निखिल , किशोर पंड्या,

अजय , दक्ष , कांता , रतन किशोर पंड्या ओड्रिला मंडल  शिल्पा,अक्षी,शाबुनी मंडल,हिमानी पाठक, मीनल , खुशी,अंजलि,कृपाली भट्ट , शुभम , कल्प , काव्य , हमेंद्र , जतिन , सुनील, नेमिष , प्राण नाथ निमाई प्रभु, श्रीमति चंद्रकांता वैष्णव, अनिता, अर्चना  और रचना व्यास, विभा , मानव ,अरुण ,अचिंत्य दशरथी प्रभु,अभिनंदन निमाई प्रभु, नीरज पाठक, सुरेश नैमिष निखिल,अजय,रौनक, कुशल सहित बड़ी संख्या में साधक-साधिकाएं और श्रृद्धालु उपस्थित थे।