उदयपुर विज्ञान समिति और डॉ डी एस कोठारी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 11वीं मासिक प्रौधोगिकी व्याख्यान माला में डॉ के के शर्मा ने नाभीकीय ऊर्जा संयंत्रों में भारी जल की भूमिका के बारे में बोलते हुए बताया कि भारत के ऊर्जा की कुल आवश्यकता में नाभीकीय ऊर्जा का महत्वपूर्ण योगदान है। भारत में कुल 25 रियेक्टर है। रियेक्टर को चलायमान रखने के लिये चार स्तरीय ऊर्जा दी जा रही है तथा संयंत्र द्वारा किसी भी प्रकार की विकिरण बाहर नहीं निकल रहा है। भारत के सभी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानकों से भी कड़े मानक तय किये गये है तथा उनका कडाई से पालन करने के लिए सभी प्रबंध किये गए हैं। अभी तक अधिकतर संयंत्रों में ऊर्जा हेतु युरेनियम का उपयोग होता है लेकिन भारत में थोरियम की उपलब्धता अधिक होने के कारण आने वाले समय में थोरियम का ईंधन के रूप में उपयोग किया जायेगा।
मीडिया प्रभारी प्रोफेसर विमल शर्मा ने बताया की अध्यक्षता करते हुए विज्ञान समिति के अध्यक्ष डॉ महीप भटनागर ने आणविकी ऊर्जा की आवश्यकता एवं इनकी प्रदूषण रहित ऊर्जा उत्पादन की बात को रेखांकित किया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता का परिचय प्रो. के पी तलेसरा ने प्रस्तुत किया। इसमें आदिनाथ सी.सै. स्कूल के विद्यार्थिओं ने भाग लिया एवं जिज्ञासा स्वरूप अनेक प्रश्न पूछे।
इस कार्यक्रम में कोठारी संस्थान एवं समिति के अनेक गणमान्य सदस्यों - इंजी एम पी जैन, इंजी बी एल खमेसरा, इंजी आर के खोखावत, मुनीष गोयल आदि प्रमुख रहे। धन्यवाद विज्ञान समिति के महासचिव डॉ आर के गर्ग ने दिया।